मीडिया बनाम वेस्यालय (how media is helping society by being in the society )

आज भी कुछ अच्छा पत्रकार और पत्रकारिता है जिसके कारण स्तम्भ टिका है,
वरना ई जो लोग हिला रहा है ना अब तक उखड़ के गिर गया होता,
मने धीरे धीरे कोठे तक हमारी मीडिया पहुँच गयी है फिर से चौखट के अंदर तक लाया कैसे जाय समस्या इस बात की है?
फिर भी हम वेस्यालय में वेस्या बन समाज की सुरक्षा करता रहूंगा।।

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Hinglish

भाग रे भाग ई ता अंग्रेजी हौ! #Hindi to #Hinglish

A story about education change in India starting from village to city. How we have changed from Hindi to Hinglish. बात यही की 22-23 साल पुरानी है जब हमारा दाखिला गाँव के प्राथमिक विद्यालय से दूर छोटे विकासशील शहर में कराया गया,तब गाँव के उन विशिष्ट बच्चों में शामिल हो गए जो गाँव से दूर अध्ययन के लिये जाते थे,

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#एक_शिक्षक_ऐसा_भी

अभी कुछ दिनों तक कोई जानता भी ना था ये युवा है कौन?? लेकिन मेहनत और संघर्ष ने ऐसा रंग लाया की रातों रात चमकता तारा बन गया सायद आप समझ गए हों- जी हां #प्राथमिक_विद्यालय_मूढाघाट_के_शिक्षक_सर्वेष्ट_मिश्रा जिन्होंने अपने दम पर बिना किसी सरकारी सहायता का इंतज़ार किये प्राथमिक विद्यालय को Read more…

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वर्ग रहित कोरी कल्पना

वर्ग रहित समाजवाद और वर्ग रहित राजनीति को सारी शिक्षाएं सरासर निरर्थक सिद्ध होती हैं। (राजनीति अपने आप में विस्तृत रूप धारण किये है)समाज या देश का सर्वहारा वर्ग ही  एकलौता समाजवादी है, जब इनको अपने राजनीति का हिस्सा मानकर कोई इनके अधिकार की बात करता है तो इनको आशा Read more…

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और बदल गयी जिंदगी…….

बुद्धि काजू,बादाम खाने से नही,बल्कि ठोकर लगने से खुलती है। आज हम एक ऐसे ही प्रमाण से रूबरू होंगे,पप्पू 3 बहन 1 भाई में चौथे नम्बर पर था कहने के तात्पर्य है तीनों बहने उससे बड़ी थी और भाई छोटा,इसलिए बहनों को शादी का कोई ज्यादा बोझ पप्पू पर तो Read more…

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आज़ादी के बाद का भारत…

भारत को आज़ाद हुए आज 68 साल से ऊपर हो गया पर क्या भारत अपने आज़ादी से आज तक कुछ भी बदल पाया ,या कहें जितना भी कुछ था उसे सहेज़ की रख पाया या जो था उसे भी धूमिल कर दिया..अगर एक के बाद एक मुद्दे पर नज़र डाले Read more…

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गणतंत्र दिवस विशेष…

गणतंत्र दिवस विशेष… भारत का एक राष्ट्रीय पर्व जो प्रति वर्ष 26 जनवरी को मनाया जता है इसी दिन सन् 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ था। एक स्वतंत्र गणराज्य बनने और देश के संक्रमण को पूरा करने के लिए 26 जनवरी 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा इसे Read more…

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Politics In Education System

सौभाग्य कहें या दुर्भाग्य की हम भारत में जन्मे जहाँ अंबेडकर जैसे लोग जन्मे जो दलितों के लिए अलग राज्य की मांग करते थे जिसका मूल्य भारत था..जिन्हें भारत के संविधान का निर्माता कहा गया अब ये तो बहुत ही विडम्बना है की भारत की छाती को दो फांक में Read more…

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